जब जीने के लिए खाना पड़ा दोस्तों का मांस, विरान इलाके में 72 दिन ऐसे जिंदा रहे खिलाड़ी

“योग्यतम की उत्तरजीविता” (सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट) एक वैज्ञानिक सिद्धान्त है जिसका मतलब है कि जो सबसे योग्य होगा और बदलते वातावरण में अपने में बदलाव ला कर उस में एडाप्ट कर लेगा वही आगे तक जीवित रहेगा, संस्कृत में इसी को दूसरे प्रकार से यों कहा गया है- ‘दैवो दुर्बलघातकः’ यानि भगवान भी दुर्बल को ही मारते हैं। वैसे तो ये सिद्धान्त हमेशा से धरती के जीवों पर लागू होता रहो है लेकिन इसका सबसे व्यवहारिक उदारहण हैं 1972 में हुई एक प्लेन क्रैश की घटना जिसमें बचें लोगों ने सिर्फ बद् से बद्त्तर हालातों का सामना किया बल्कि जीने के लिए उन्हें अपने ही दोस्तों और परिचितों का मांस खाना पड़ा। ये घटना मानव जीवन के इतिहास में जिवट्ता की मिसाल बन गया जिस पर किताब लिखी गयी और Film भी बनी। दरअसल 13 अक्टूबर 1972 को उरुग्वे के ओल्ड क्रिश्चियन क्लब की रग्बी टीम चिली के सैंटियागो में मैच खेलने जा रही थी

पर इसी दौरान मौसम खराब होने की वजह से प्लेन क्रैश हो गया। उस प्लेन में 45 लोग सवार थे, जिनमें से 12 की मौत प्लेन क्रैश के दौरान ही हो गई थी। आइए जानते हैं पूरी बात